शनिवार, 19 जून 2021

अनकही


 और किस जबां से

लिख दूं दिल की बात

कोई बात दिल की

तुम तक पहुंचती ही नहीं


छू लेती है 

न जाने कितनों का मन

आंगन तुम्हारे जा कर 

ये ठहरती ही नहीं


बड़ी बेताब होती हैं

निकलती हैं जब मन से

उतनी ही हताश 

पड़ी रहती हैं जब

तुमसे कहीं ये मिलती नहीं है


एक बार सही 

कह दो इनसे आकर 

न फूटें नज़्म बन

इन मीठे लफ़्ज़ों की

तुमसे बनती नहीं है 


चुप ही रहेंगे उम्र भर जब 

जानेंगे ख़यालों के आखिरी 

हिस्से में तुम्हारी,

कहीं दर्ज इनकी

गिनती नहीं है


और किस जबां से लिख दूं

तुम संग एक मुलाकात

अभागे इन लफ़्ज़ों से

कोई बात अब,बनती नहीं है



गुरुवार, 17 जून 2021

वक्त - वक्त कि बात है


 न  तुम  गलत  न  हम  सही  ये  वक्त - वक्त  की  बात  है

न तुम मेरे हुए न मैं तुम्हारा हुआ ये सब किस्मत की बात है


यूं  तो  कमी  कुछ  तुम्हें  भी  नहीं कमी कुछ मुझे भी नहीं

हो तो जाएं हम भी किसी और के बस अपनी अपनी चाहत की बात है


भले  दूर  हो  तुम  मुझसे  और  बेशक  दूर  हूं  मैं  तुमसे

कौन छीन ले खुदा से तुम्हें अपनी-अपनी इबादत की बात है


यूं   पा  तो  हम  भी  लेते  ज़माने   से  लड़  कर  तुम्हें

पर क्या करें उल्फत में अपनी-अपनी शहादत की बात है


जिन्हें  इश्क होता है सच्चा वो महका करते हैं  सांसों  में

वरना  तो  भुला  देना  किसी  को  इक  रात  की बात है


तुम गलत मैं सही या मैं गलत तुम सही फिजूल हैं बातें

अब इश्क  में  तोहमतें  लगाना  सियासत  की  बात  है


जिसका  होना  था  उसे  वो  हो  चुका  है  उसका 

उससे  छीन  लेना  उसे  वहशत  की  बात  है..!!

पागल

  चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं , उसके दिल की हर एक बात तुम्हें बताता हूं,  वह यूं ही नहीं भटकता है दरबदर उसके भटकने का हर एक राज बताता...