मंगलवार, 10 जनवरी 2023

पागल

 


चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ,

उसके दिल की हर एक बात तुम्हें बताता हूं,

 वह यूं ही नहीं भटकता है दरबदर उसके भटकने का हर एक राज बताता हूं,


 चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ।

  

उसके दिल पर रखा होगा कोई भारी पत्थर,

 फिर भी चलो मैं तुम्हें उस की धड़कनें सुनाता हूं ,

 चलो उस पत्थर का मैं तुम्हें भार बताता हूं,

  चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ।

  

धूप धाम दिन शाम को ककरिली सड़कों पर चलता जीवन दिखाता हूं ,

चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ,


उसके दिल में है भूख और मन में है प्यास,

 फिर भी मैं तुम्हें उसके अधरों पर मुस्कान दिखाता हूं,

  चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ।

  

हट हट चल भाग यहां से गूंजता उसके कानों में सौ बार सुनाता हूं,

 चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं,

  रोटी के लिए जो चलता है दिन रात आंखें मलता है ,

  चलो मैं तुम्हें उसके आंसू दिखाता हूं,

   चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ।

   

उसकी हरकतों में छीना झपटी और पांव में छाले हैं,

 उसको देख लोग काला साया कहने वाले हैं,

  चलो मैं तुम्हें टोने, टोटके, मंत्र, जादू का खेल असरदार दिखाता हूं ,

  चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं ।

  

दिल टूटे भी ना, साथ छूटे भी ना ,कोई रूठे भी ना, सिर फूटे भी ना, कुछ लुटे भी ना ,

जिंदगी की अजब रफ्तार दिखाता हूं ,

बस यही है पागल जिसे मैं तुम्हें बताता



प्रवीण शुक्ला( शास्त्री जी).........🖋️🖋️


पागल

  चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं , उसके दिल की हर एक बात तुम्हें बताता हूं,  वह यूं ही नहीं भटकता है दरबदर उसके भटकने का हर एक राज बताता...