भींगती आँखों से जब उम्मीदें बहने लगे
सब तरह से हार जब सब्र को ढकने लगे,
तभ क्यूँ न आँखें मूंदकर क्यूँ न लम्बी साँस भर
उम्मीदों को बहने न दूँ सबको थमने न दूँ।
मैंने कुछ ऐसा सोचा है.......
जब कोई अजीज़ अपना यू छोडकर जाने लगे
वक़्त की मनमानियाँ हर-वक़्त तडपाने लगे,
क्यूँ न अपनी भूल पर क्यूँ न सबकुछ भूलकर
दुनियाँ को समझा करूँ वक़्त से लडता फिरूँ_____
मैंने कुछ ऐसा सोचा है।
बह रही उलटी हवाएँ बहे येह कबतक बहेगी
देखता हूँ अब भिड़े यह कितना भिड़ेगी
जब मुझे चलना ही है पथ पर बढना ही है।
तोह मैं ऐसे राह पर क्यूँ रुकूँ क्यूँ थमूँ??
मैंने कुछ.......
मैं समुन्दर की लहर हूँ नाह कोई सीपी मोती
कौन सा पथ दुर्गम मुझे है, किसने मेरी राह रोकी??
लाख़ सीपी पालता हूँ, पत्थरों को ढालता हूँ।
तोह इन उछलती नावों से क्यूँ छिपूं क्यूँ डरूँ_____
मैंने कुछ ऐसा सोचा है......
भींगती आँखों से जब उम्मीदें बहने लगे
सब तरह से हार जब सब्र को ढकने लगे,
तभ क्यूँ न आँखें मूंदकर क्यूँ न लम्बी साँस भर
उम्मीदों को बहने न दूँ सभको थमने न दूँ।
मैंने कुछ ऐसा सोचा है।

