शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

जमाना ब्रांड का


आंशिक चिंतन✍️✍️

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- जैसे-जैसे मेरी उम्र में वृद्धि हो रही है। मुझे समझ आ रहा है कि मैं तीन सौ की घड़ी पहनूं या तीस हज़ार की दोनों समय एक जैसा ही बतलाती है। मेरे पास चार सौ का बैग हो या चालीस हज़ार का इसके अंदर के सामान में कोई परिवर्तन नहीं होंगा | मैं तीन सौ गज़ के मकान में रहूँ या तीन हज़ार गज़ के मकान में, तन्हाई का एहसास एक जैसा ही होगा | आख़िर में मुझे यह भी पता चला कि यदि मैं बिजनेस-क्लास में यात्रा करूं या इक्नामी क्लास में अपनी मंजिल पर उसी नियत समय पर ही पहुँचूंगा_____

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इसलिए बच्चों को बहुत ज़्यादा अमीर होने के लिए प्रोत्साहित मत करिए बल्कि उन्हें यह सिखाइये कि वेह ख़ुश कैसे रह सकते हैं। और जभ बडे हों तोह चीजों के महत्व को देखें उसकी कीमत को नहीं | फ़्रांस के एख़ वाणिज्य मंत्री का कहना था : ब्रांडेड चीजें व्यापारिक दुनिया का सबसे बडा झूठ है। जिसका असल उद्देश्य तोह अमीरों की जेब से पैसा निकालना होता है। लेकिन ग़रीब और मध्यम वर्ग लोग इससे बहुत ज़्यादे प्रभावित होते हैं।


क्याह यह आवश्यक है कि मैं आईफ़ोन लेकर चलूं-फिरूँ ताकि लोग मुझे बुद्धिमान और समझदार मानें?? क्या यह आवश्यक है कि मैं रोजाना मैकडॉनल्ड या केएफ़सी में खाऊँ ताकि लोग यह न समझें कि मैं कंजूस हूँ? क्या यह आवश्यक है कि मैं प्रतिदिन दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में जाकर उठक-बैठक लगाया करूँ ताकि लोग यह समझें कि मैं एक रईस परिवार से हूँ? क्या यह आवश्यक है कि मैं गुचि लकॉस्ट एडिडास या नाइक का ही पहनूं ताकि हाई स्टैट्स वाला कहलाया जाऊँ? क्या यह आवश्यक है कि मैं अपनी हर बात में दो-चार अंग्रेजी शब्द शामिल करूँ ताकि सभ्य कहलाऊं?? क्या यह आवश्यक है कि मैं एडेल याह रिहाना को सुनूँ ताकि साबित कर सकूँ कि मैं विकसित हो चुका हूँ।

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नहीं साहब | मिरे कपडे तोह आम दुकानों से ख़रीदे हुए होते हैं। दोस्तों के साथ किसी ढाबे पर भी बैठ जाता हूँ। भुख लगे तोह किसी ठेले से लेकर खाने में भी कोई अपमान नहीं समझता.. अपनी सीधी-सादी भाषा में बोलता हूँ। क्यूँकि मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जोह एख़ ब्रांडेड जूतों की जोडी की क़ीमत में पूरे सप्ताह भर का राशन ले सकते हैं। मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं जोह इक मैकडॉनल्ड के बर्गर की क़ीमत में पूरे परिवार का खाना बना सकते हैं। बस मैंने यहाँ यह रहस्य पाया है कि बहुत सारा पैसा ही सभ कुछ नहीं है। जोह लोग किसी की बाहरी हालत से उसकी क़ीमत का अंदाज़ा लगाते हैं वह तुरंत अपना इलाज करवाएं_____


मानव मूल की वास्तविक क़ीमत उसकी नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीक़ा, सहानुभूति, अपनापन और भाईचारा है। नाह कि उनकी मौजूदा शक़्ल और सूरत | आपकी सोच में ताक़त और चमक होनी चाहिए छोटा-बडा होने से फ़र्क नहीं पडता सोच बडी होनी चाहिए.. मन के भीतर एख़ दीप जलाईये और सदा मुस्कुराते रहिए_____

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8 टिप्‍पणियां:

पागल

  चलो मैं तुम्हें आज पागल सुनाता हूं , उसके दिल की हर एक बात तुम्हें बताता हूं,  वह यूं ही नहीं भटकता है दरबदर उसके भटकने का हर एक राज बताता...